भूपेन हजारिका की आवाज की गहराई और प्रभाव ने उन्हें अलग पहचान दी. 'सुधाकंठ' की उपाधि उन्हें असम के प्रसिद्ध कवि आनंद चंद्र बरुआ से मिली थी.